भाजपा के मार्गदर्शक मंडल में शामिल लालकृष्ण आडवाणी की दुर्दशा पर भले ही पूरे देश में मातम मनाया जा रहा हो, लेकिन इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दोषी ठहराने वाले लोग पूरी तरह गलत हैं क्योंकि आडवाणी ने स्वयं ही ऐसे हालात पैदा कर दिए थे कि पार्टी को उनसे पीछा छुड़ाना ही पड़ा।
अगर भाजपा ऐसा नहीं करती तो 2014 में उसकी सरकार नहीं बन पाती और पाटी को फिर से कांग्रेस के हाथों हार झेलनी पड़ती। ये नरेन्द्र मोदी का समर्थन नहीं है बल्कि वह हकीकत है जिसे जानकर भी अनजान बनने का नाटक किया जा रहा है।
असल में 2004 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार को हरवाने में लालकृष्ण आडवाणी और उनके पिछलग्गुओं का हाथ था जिन्होंने इंडिया शाइनिंग का नारा देकर देशवासियों को चिढ़ा दिया था। उसके बाद 2009 में भी आडवाणी और उनकी चौकड़ी ने पार्टी के सत्ता में आने की राह रोक दी थी। इसके बाद पार्टी ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाकर चुनाव लड़ा तो उसे पूर्ण बहुमत मिल गया। अगर पार्टी 2014 में भी आडवाणी के नेतृत्व में चुनाव लड़ती तो सत्ता तो दूर उसके सांसदों की संख्या तक घटने का अंदेशा था।
अगर भाजपा ऐसा नहीं करती तो 2014 में उसकी सरकार नहीं बन पाती और पाटी को फिर से कांग्रेस के हाथों हार झेलनी पड़ती। ये नरेन्द्र मोदी का समर्थन नहीं है बल्कि वह हकीकत है जिसे जानकर भी अनजान बनने का नाटक किया जा रहा है।
असल में 2004 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार को हरवाने में लालकृष्ण आडवाणी और उनके पिछलग्गुओं का हाथ था जिन्होंने इंडिया शाइनिंग का नारा देकर देशवासियों को चिढ़ा दिया था। उसके बाद 2009 में भी आडवाणी और उनकी चौकड़ी ने पार्टी के सत्ता में आने की राह रोक दी थी। इसके बाद पार्टी ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाकर चुनाव लड़ा तो उसे पूर्ण बहुमत मिल गया। अगर पार्टी 2014 में भी आडवाणी के नेतृत्व में चुनाव लड़ती तो सत्ता तो दूर उसके सांसदों की संख्या तक घटने का अंदेशा था।
